जीन पियाजे का ज्ञान निर्माण प्रक्रिया

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जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाले तत्कालीन मनोवैज्ञानिक में सर्वाधिक प्रभावशाली स्वीकार किया जाता है ।

प्याजे का जन्म 9 अगस्त 1896 को स्विट्जरलैंड में हुआ था । 22 वर्ष में जंतु विज्ञान में पीएचडी उपलब्धि अर्जित की ।

जीन पियाजे का ज्ञान निर्माण प्रक्रिया अवस्था

अपने आप लोगों के आधार पर पियाजे ने बौद्धिक विकास की संपूर्ण प्रक्रिया को चार मुख्य अवस्था में व्यक्त किया है ।

  1. संवेगात्मक गामक अवस्था
  2. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
  3. मूर्त संक्रिया अवस्था
  4. औपचारिक संक्रिया अवस्था

संवेदनात्मक गामक अवस्था

इस अवस्था मैं बालक देखने पहुंचने पकड़ने चूमने आदि की सोता के लिया करते हैं यह अवस्था जन्म के उपरांत प्रथम 2 वर्षों तक चलती है ।

संवेगात्मक गामक अवस्था के दौरान शिशु असहाय जीवधारी से गतिशील अर्धवार्षिक से अथवा सामाजिक दृष्टि से चतुर व्यक्ति बन जाता है

लगभग डेढ़ वर्ष की आयु में बालक कुछ करने से पहले सोचना प्रारंभ करता है ।

पूर्व संक्रियात्मक अवस्था

2 से 7 वर्ष के बीच

इस अवस्था में भाषा का प्रयोग प्रारंभ होता है

बालक विभिन्न घटनाओं एवं कार्यों के संबंध में क्यों तथा कैसे जैसे प्रश्नों के जानने में रुचि रखते हैं ।

लड़के अपने बड़े भाई तथा पिता के तरह किताब या समाचार को पढ़ने तथा लड़कियां अपने माता की तरह खाना पकाने तथा सफाई करना शुरू करते हैं

2 वर्ष के बालक 200 शब्दों को समझ लेता है जबकि 6 वर्ष का भला 16000 शब्दों को समझ लेता है

पूर्व संक्रियात्मक अवस्था में बालक पराया पुलिसमैन डॉक्टर वकील नेता अध्यापक पोस्टमैन जैसी सामाजिक भूमिकाओं का अनुकरण करते हैं ।

मूर्त संक्रिया अवस्था

7 से 12 वर्ष

मूर्त संक्रियात्मक था लगभग 7 से 12 वर्ष के बीच की अवस्था को कहा जाता है ।

इस अवस्था में तार्किक विचारों का स्थान लेने लगता है

बालों की इस अवस्था में माप सकते हैं तोड़ सकते हैं और मीन सकते हैं

जब सूचनाएं मुहूर्त होती है तब ठीक-ठाक से उनकी तुलना भी कर सकते हैं

इस अवस्था में बालक आकार भाड़ा आदि को क्रमबद्ध रूप में व्यवस्थित करने लगता है

औपचारिक संक्रिया अवस्था

संज्ञानात्मक विकास की अंतिम अवस्था औपचारिक संक्रिया अवस्था है

यह अवस्था लगभग 11 से 15 वर्ष की आयु तक चलती है

बालक ने उसको निकालने लगता है

व्याख्या करने लगता है परी कल्पनाएं बनाने लगता है

बालक की बौद्धिक क्षमता क्रमबद्ध होने लगती है

बाबा की एक साथ अधिक से अधिक तत्व को समझने लगता है