व्यक्तित्व का मापन ( व्यक्तित्व आविष्कारका , प्रक्षेपण विधि , प्रेक्षण विधि )

व्यक्ति की मापन से तात्पर्य व्यक्ति की सील गुणों के बारे में पता लगा कर यह निश्चित करना होता है कि कहां तक संगठित है या विसंगठित है । किसी भी व्यक्ति के भिन्न-भिन्न शीलगुण जब आपस में संगठित होते हैं तो इससे व्यक्ति का व्यवहार समान्य होता है परंतु उसके शीलगुण भी विसंगठित होते […]

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जीन पियाजे का ज्ञान निर्माण प्रक्रिया

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में कार्य करने वाले तत्कालीन मनोवैज्ञानिक में सर्वाधिक प्रभावशाली स्वीकार किया जाता है । प्याजे का जन्म 9 अगस्त 1896 को स्विट्जरलैंड में हुआ था । 22 वर्ष में जंतु विज्ञान में पीएचडी उपलब्धि अर्जित की । जीन पियाजे का ज्ञान निर्माण प्रक्रिया अवस्था अपने आप लोगों के […]

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अभिरुचि का परिभाषा और कार्यात्मक एवं संरचनात्मक अर्थ

अभिरुचि एक ऐसा पद है जिसका प्रयोग पर आराम से ही मनोवैज्ञानिकों द्वारा ढीले ढाले औरतों में किया जाता रहा है । प्रारंभ में इस पद का प्रयोग ज्ञान , जिज्ञासा , प्रेरणा इच्छा आदि जैसे शब्दों को समानांतर किया जाता था । परंतु 1940 ईस्वी के बाद मनोवैज्ञानिकों ने विशेषकर शिक्षा मनोवैज्ञानिकों ने इस […]

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मनोवृति , मनोवृत्ति के घटक | शिक्षण परिस्थितियों में मनोवृति में परिवर्तन

मनोवृति किसी व्यक्ति वस्तु या घटना के प्रति एक खास नाम से अनुप्रिया करने की मानसिकता तत्परता होती है उसे मनोवृति कहते हैं । मनोवृति में व्यक्ति अनुकूल या प्रतिकूल की बीमा पर किसी व्यक्ति वस्तु या घटना के प्रतिक्रिया करने की तत्परता होती है । उदाहरण के तौर पर जिस छात्र के मनोवृति कला […]

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ज्ञान के प्रकार , विशेषता , अर्थ , प्रकृति ,

ज्ञान से आशय वास्तविकता के किसी पझ के प्रति जागरूकता तथा समाज से है जो कि सत्य विश्वास पर आधारित हो । यह स्पष्ट सूचना या तथ्य के जो की तार्किक प्रक्रिया के प्रयोग के द्वारा वास्तविकता से प्राप्त किया जाता है ।पारंपरिक दार्शनिक उपाग्रम के अंतर्गत ज्ञान के लिए 3 शब्दों का होना आवश्यक […]

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