ज्ञान और कौशल में अंतर | विश्वास तथा सत्य में अंतर | ज्ञान और सूचना में अंतर

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कौशल क्या है ?

कौशल से तात्पर्य है कि किन्ही विशेष परिस्थितियों में ज्ञान को अनुप्रयोग में लाने की योग्यता से है ।

कौशल वह योग्यताएं है जो अच्छे प्रदर्शन में सहायक होती है । किसी भी कौशल का विकास करना वह उसमें उत्कृष्ट लाना अत्यंत कठिन कार्य है । जिसके लिए अत्यधिक अभ्यास की आवश्यकता होती है ।

विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न कौशलों में दक्षता का होना आवश्यक है । जैसे :- शिक्षण कौशल , संगठन कौशल , प्रदर्शन कौशल

कौशल के लिए शिक्षा की जरूरत नहीं है।

ज्ञान और कौशल में अंतर

ज्ञान शिक्षा अनुभव से प्राप्त के माध्यम से प्राप्त होता है जबकि कौशल अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होता है ।
ज्ञान सैद्धांतिक को समाहित रखता है ।कौशल व्यवहारिक योग्यताओं को समेटता है ।
ज्ञान का अर्जन किया जाता है । यह जन्मजात नहीं होता है । जबिक कौशल जन्मजात हो सकता है ।
ज्ञान का क्षेत्र व्यापक एवं विस्तृत है । कौशल का क्षेत्र सीमित है ।
ज्ञान के द्वारा मनुष्य का सर्वांगीण विकास होता हैजबकि कौशल के द्वारा मनुष्य का सर्वांगीण विकास नहीं होता बल्कि यह तो केवल किसी निश्चित क्षेत्र में दक्षत होता है
ज्ञान का संबंध जीवन भर या जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है एवं नए रूपों को दर्शाती है ।जबकि कौशल के लिए एक बार सीखने के पश्चात उसे बार-बार सीखने की आवश्यकता नहीं पड़ती पर है
ज्ञान कौशल का आधार हैजबकि कौशल ज्ञान में समाहित होता है

ज्ञान और सूचना में अंतर

ज्ञान सूचना
प्रत्यय को समझना को समझना ही ज्ञान है । प्रत्यय से संबंधित तथ्य सूचनाएं हैं ।
ज्ञान सूचनाओं के माध्यम से विकसित होता है सूचनाएं किसी घटना के अवलोकन के फल स्वरुप विकसित होती है
ज्ञान हमारे मस्तिष्क में सूचनाओं के संग्रह के बाद विकसित होती हैसूचनाएं हमारे मस्तिष्क से बाहर उपस्थित तथ्य होते हैं जो फल स्वरुप में मौजूद होते हैं स्वतंत्र रूप में मौजूद होता है
ज्ञान सूचनाओं पर निर्भर होता हैउसने तथ्यों एवं संदेशों पर निर्भर होती है ।
ज्ञान प्राप्ति, सोच समझ ही पहल करके प्राप्त किया जा सकता है । सूचना या स्वतंत्र रूप से विद्यमान होती है
ज्ञान प्राप्त करने के लिए समझना , सोचना विश्लेषण संश्लेषण और मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं से गुजारना पड़ता है । सूचनाएं प्राप्त करने के लिए किसी घटना का अवलोकन और प्रत्याक्षीकरण करना पड़ता है ।
ज्ञान में बदलाव आ सकता है । सूचनाएं तथ्य पर आधारित होने के कारण सदैव एक जैसी बनी रहती है

विश्वास. :- विश्वास मन की एक स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति सोचता ( चिंतन ) है , कि कुछ मामले तथ्य ऐसे होते हैं जिन्हें तथ्यात्मक सचिव के माध्यम से सीधी नहीं किया जा सकता है बल्कि वे केवल अनुभव जन होते हैं विश्वास के रूप में प्रस्तुत किया जाता है ।

सत्य :- सत एक भाव है जो निश्छलता पवित्रता और अहिंसा का प्रतीक है । किसी भी गुप्त बात को प्रकाशित कर सामने लाकर उसे अपमानित कर देना । सत्ता चरण नहीं है ।

सत्य भाषा का अर्थ :- शिवानी का संयम भाषा का विवेक आज बहुत से कला भाषा विवेक के अभाव में होते हैं ।

विश्वास तथा सत्य में अंतर

विश्वाससत्य
विश्वास मन की एक स्थिति हैसत्य को तथ्यों द्वारा स्थापित किया जाता है।
विश्वास अनुभवजन्य होता है। सत अनुभव एवं प्रयोगों का सम्मिश्रण है ।
विश्वास के लिए तत्वों का गलत या सही होना आवश्यक नहीं है सत्य के लिए तथ्यों का सही होना एक अनिवार्य शर्त है
विश्वास धार्मिक एवं पक्षपात निरपेक्ष होता है । सत्य केवल एक ही होता है
विश्वास व्यक्ति की सफलता एवं असफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । आप व्यक्तिगत रूप से व्यक्ति पर प्रभाव नहीं डालता है परंतु उसके ज्ञान में वृद्धि करता है