मूल्यांकन का अर्थ , प्रकार और अध्यापक की भूमिका | अच्छे मूल्यांकन की विशेषता

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मूल्यांकन हमारे जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक किसी न किसी रूप में मूल्यांकन होता रहता है हम जीवन के हर एक क्षेत्र में इस मूल्यांकन का प्रयोग करते रहते हैं मनोवैज्ञानिक एवं शिक्षा में और भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दोनों ही विषयों में किसी भी प्रकार का विकास बिना मूल्यांकन का संभव नहीं हो सकता है हमारी कक्षा में कौन-कौन सा छात्र सबसे अधिक होशियार है कौन व्यक्तित्व स्वार्थी है हर आदमी मतलबी होता है इत्यादि जैसे कथन का आधार मूल्यांकन ही है अर्थात इन सभी प्रश्नों का उत्तर बिना मूल्यांकन का नहीं किया जा सकता है मूल्यांकन के द्वारा सावधानीपूर्वक यह निर्णय लिया जा सकता है कि कौन सी वस्तु बुरी है या अच्छी है सनी क्षेत्रों में किसी बालक का मूल्यांकन करते समय उसका वातावरण तथा सामाजिक पृष्ठभूमि को पूरी तरह से समझ लेना केवल आवश्यक ही नहीं है बल्कि अनिवार्य भी है ।

किसी बालों को किस प्रकार की शिक्षा दिया जाए उसका निश्चय उसके बिना उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को जाने बगैर नहीं दिया जा सकता है अतः कहा जा सकता है कि समाज के विकास का पूरा चक्र मूल्यांकन पर ही निर्भर करता है

मूल्यांकन का अर्थ :- मूल्यांकन एक क्रमिक प्रक्रिया है जो महत्वपूर्ण अंग है या शिक्षा के उद्देश्यों से घनिष्ठ रूप से संबंधित है

दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि सीमा निर्धारित करके उनके प्रगति के स्तर को ज्ञान करवाकर उचित या अनुचित का निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है ।

मूल्यांकन की कुछ निम्नलिखित विशेषताएं

व्यापकता :- शिक्षक और छात्रों के विकास के सभी पहलुओं का आकलन करने की कोशिश करनी चाहिए इस प्रकार छात्र के उपलब्धि का मूल्यांकन करने के लिए उसको द्वारा विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है ।

निरंतरता :- मूल्यांकन शिक्षा के रूप में एक सिर्फ एक परीक्षा नहीं है बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है मूल्यांकन कार्य को पूरा करने के लिए कोई निश्चित सीमा नहीं है लेकिन यह एक निरंतर प्रक्रिया है ।

मूल्यांकन के प्रकार

शिक्षा के विभिन्न चरणों में मूल्यांकन को एकीकृत किया गया है

मूल्यांकन चार प्रकार के होते हैं

  1. स्थानन मूल्यांकन
  2. निर्माणात्मक या रचनात्मक मूल्यांकन
  3. नैदानिक मूल्यांकन
  4. योगात्मक मूल्यांकन

स्थान मूल्यांकन

छात्रों के उस ज्ञान और कौशल को निर्धारित करता है जो शिक्षक के शुरुआत में आवश्यक होते हैं राजस्थान मूल्यांकन का उद्देश्य किसी कुर्सी या विषय के लिए शिक्षार्थी योगिता की जांच करना होता है इसी उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं का भी आयोजन किया जाता है ।

निर्माणात्मक या रचनात्मक मूल्यांकन

निर्माणात्मक मूल्यांकन को आंतरिक मूल्यांकन भी कहा जाता है यह कार्यक्रम का महत्व जानने की एक विधि है , जो शिक्षण कार्यक्रम की गतिविधियों प्रगति कर रहे हो यह प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करती है इस मूल्यांकन के अनुसार छात्र शिक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी सफलता या विफलता के बारे में प्रतिपुष्टि प्रधान कर सकता है ।

मापन एवं मूल्यांकन में अंतर

साधारणतः व्यक्तियों द्वारा मापन तथा मूल्यांकन का एक ही अर्थ है । जबकि वास्तविक रूप में इस में काफी अंतर होता है मापन मूल्यांकन प्रक्रिया का प्रथम पद है मूल्यांकन में मापन के बाद मापन के परिणामों की व्याख्या किया जाता है मापन से हमें यह पता चलता है कि कोई वस्तु कितनी है जबकि मूल्यांकन में यह बताता है कि कोई वस्तु कितनी अच्छी है ।

मूल्यांकनमापन
मूल्यांकन एक नवीन विचारधारा हैमापन एक प्राचीन धारणा है
मूल्यांकन एक विस्तृत प्रक्रिया है मापन का क्षेत्र संकुचित एवं सीमित होता है
मूल्यांकन छात्र की रूचि अभिवृत्ति मानसिक योग्यता व्यक्तित्व का संपूर्ण पशुओं का जांच करती हैमापन व्यक्तियों के कुछ आयामों को ही प्रतीक प्रदान करता है
मूल्यांकन द्वारा तुलनात्मक अध्ययन संभव होता है । तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं होता है
शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग होता हैशिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग नहीं भी हो सकता है
मूल्यांकन में अधिक समय शक्ति एवं धन की आवश्यकता होती है । मापन में कम समय शक्ति एवं धन की आवश्यकता होती है
मूल्यांकन द्वारा छात्रों का स्थिति का सही आकलन से उनके संबंध में निश्चित धारणा बनाई जा सकती है ।मापन द्वारा छात्रों का स्थिति का ना तो सही ज्ञान होता है ना ही उनके संबंध में निश्चित धारणा बनाई जा सकती है
मूल्यांकन संपूर्ण शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है । मापन मूल्यांकन का एक अंश है
मूल्यांकन उद्देश्य केंद्रित होता है। मापन पाठ्यवस्तु केंद्रित होता है
मूल्यांकन के वस्तु का मूल्य क्या हैमापन मैं बस तू कितनी है ? का उत्तर दिया जाता है ।
मूल्यांकन निरंतर चलने वाली प्रक्रियामापन किसी भी समय किया जा सकता है
मूल्यांकन का कार्य साक्ष्यों के विश्लेषण से करना होता है या निकालना होता हैमापन का कार्य एकीकृतकरण से करना होता है ।
मूल्यांकन पर इन आत्मक या संज्ञानात्मक के साथ- साथ में गुणात्मक भी होता है। । मापन परिणाम मकेया संज्ञानात्मक होता है