मूल्यांकन क्या है और विशेषता अर्थ

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मूल्यांकन का अर्थ :- मूल्यांकन एक क्रमिक प्रक्रिया है जो महत्वपूर्ण अंग है या शिक्षा के उद्देश्यों से घनिष्ठ रूप से संबंधित है

दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि सीमा निर्धारित करके उनके प्रगति के स्तर को ज्ञान करवाकर उचित या अनुचित का निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है ।

मूल्यांकन की कुछ निम्नलिखित विशेषताएं

व्यापकता :- शिक्षक और छात्रों के विकास के सभी पहलुओं का आकलन करने की कोशिश करनी चाहिए इस प्रकार छात्र के उपलब्धि का मूल्यांकन करने के लिए उसको द्वारा विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है ।

निरंतरता :- मूल्यांकन शिक्षा के रूप में एक सिर्फ एक परीक्षा नहीं है बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है मूल्यांकन कार्य को पूरा करने के लिए कोई निश्चित सीमा नहीं है लेकिन यह एक निरंतर प्रक्रिया है ।

मूल्यांकन के प्रकार

शिक्षा के विभिन्न चरणों में मूल्यांकन को एकीकृत किया गया है

मूल्यांकन चार प्रकार के होते हैं

  1. स्थानन मूल्यांकन
  2. निर्माणात्मक या रचनात्मक मूल्यांकन
  3. नैदानिक मूल्यांकन
  4. योगात्मक मूल्यांकन

स्थान मूल्यांकन

छात्रों के उस ज्ञान और कौशल को निर्धारित करता है जो शिक्षक के शुरुआत में आवश्यक होते हैं राजस्थान मूल्यांकन का उद्देश्य किसी कुर्सी या विषय के लिए शिक्षार्थी योगिता की जांच करना होता है इसी उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं का भी आयोजन किया जाता है ।

निर्माणात्मक या रचनात्मक मूल्यांकन

निर्माणात्मक मूल्यांकन को आंतरिक मूल्यांकन भी कहा जाता है यह कार्यक्रम का महत्व जानने की एक विधि है , जो शिक्षण कार्यक्रम की गतिविधियों प्रगति कर रहे हो यह प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करती है इस मूल्यांकन के अनुसार छात्र शिक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी सफलता या विफलता के बारे में प्रतिपुष्टि प्रधान कर सकता है ।

मापन एवं मूल्यांकन में अंतर

साधारणतः व्यक्तियों द्वारा मापन तथा मूल्यांकन का एक ही अर्थ है । जबकि वास्तविक रूप में इस में काफी अंतर होता है मापन मूल्यांकन प्रक्रिया का प्रथम पद है मूल्यांकन में मापन के बाद मापन के परिणामों की व्याख्या किया जाता है मापन से हमें यह पता चलता है कि कोई वस्तु कितनी है जबकि मूल्यांकन में यह बताता है कि कोई वस्तु कितनी अच्छी है ।