Sound Notes

Ssc exam sound notes in hindi

Physics

ssc exam के लिए notes बनाना या बनाकर पढ़ाई करने से समय की बचत के साथ साथ टी भी अच्छी हो जाती है । इसलिए soud topic के लिये यह लिखा गया है । साथ ही पिछले साल में पूछे गए पेपर का question भी दिया गया है ।

ध्वनि एक प्रकार का कंपन है जिसकी उत्पत्ति अणुओं की गति के कारण होता है ।
ध्वनि को गमन के लिए माध्यम चाहिए बिना माध्यम के ध्वनि गमन नहीं कर सकती है ।
लेकिन सभी प्रकार का कंपन ध्वनि उत्पन्न नहीं करता है ।
ध्वनि की चाल पर प्रभाव। :- ध्वनि की चाल हमें वह दर बताती है जिससे ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु से धोने हमारे कानों तक प्रगमन करती है।

ताप का प्रभाव :- माध्यम का ताप बढ़ने पर उस में ध्वनि की चाल बढ़ जाती है । वायु में प्रति 1 डिग्री ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल 0.61 m/s मीटर प्रति सेकंड बढ़ जाती है

दाब का प्रभाव :- ध्वनि की चाल पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।

आद्रता का प्रभाव : — नमी युक्त या आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल अधिक होती है लेकिन नमी युक्त वायु का घनत्व, शुष्क वायु के घनत्व से कम होता है ।
दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि आद्रता के बढ़ने से ध्वनि का वेग बढ़ाता है तथा आदर्श के घटने से ध्वनि का वेग घटता है ।

माध्यम का प्रभाव : — ध्वनि को ठोस में तीव्र गति से द्रवों में मध्यम गति से और गैसों में अत्यंत धीमी गति से पर गमन करती है प्रतिध्वनि प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक सतह के बीच न्यूनतम 17 मीटर ( 16.6 m ) की दूरी होनी चाहिए ।

हमारे कानों पर ध्वनि का प्रभाव .1 सेकंड तक रहता है ।

पराश्रव्य ध्वनि दाब वैद्युत प्रभाव के द्वारा उत्पन्न की जाती है

पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग

  • गठिया रोग के उपचार में
  • समुद्र में जहाजों को खोजने के लिए सोनार में
  • द्रव ढोलक के रूप में अल्ट्रासोनोग्राफी में
  • कीमती कपड़ों वायुयान तथा धारियों के पुरुषों को साफ करने में
  • दूध के अंदर हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में भी उपयोग किया जाता है
  • कल कारखानों की जीवनी ओं से कालिक हटाने में अभी पराश्रव्य तरंगों का उपयोग किया जाता है ।

ध्वनि का अपवर्तन यदि ध्वनि तरंगे एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते तो उनका अपवर्तन हो जाता है अर्थात वे अपने पथ से विचलित हो जाती है ध्वनि के अपवर्तन का कारण विभिन्न माध्यमों तथा विभिन्न विभिन्न डाकू पर ध्वनि की चाल का विनविन होना

ध्वनि की तीव्रता का व्यवहारिक मात्रक डेसीमल होता है ।
बेल के दसवें भाग को डिस्मल कहते हैं ।

ध्वनि के लक्षण

ध्वनि के 3 लक्षण है

  • तीव्रता
  • तारत्व
  • गुणता

तीव्रता :- यह ध्वनि का वह लक्षण है जिसके कारण ध्वनि धीमी अथवा प्रबल सुनाई पड़ती है।

ध्वनि की तीव्रता आयाम पर निर्भर करती है । ध्वनि की तीव्रता का एस आई मात्रक माइक्रोवाट पर मीटर स्क्वायर होता है ।

45 डेसिमल तक की ध्वनि मनुष्य के कान के लिए हानिकारक नहीं है जबकि 95 से 100 डिसमिल के बाद की ध्वनि कान के लिए हानिकारक है डब्ल्यूएचओ के अनुसार ।

फुसफुस आहट में 15 से 20 डेसिबल ध्वनि निकलती है साधारण बातचीत में 30 से 40 डेसिबल ध्वनि निकलती है ।

तावत्व :-
यह ध्वनि का वह लक्षण है जिसके कारण ध्वनि मोटी या पतली सुनाई पड़ती है ।
ध्वनि का तारत्व आवर्ती पर निर्भर करता है ।

लड़की की आवाज , मच्छरों का भिन भिनाना आदि का तारत्व अधिक होता है ।

लड़कों की आवाज , मेढकों का टर टर आना कम होता है

गुणता quality
जब ध्वनि की तीव्रता और तारत्व दोनों सामान रहने पर भी ध्वनि में अंतर कर पाना गुणता के कारण होता है ।
गुणता ओवरटोन / अधिस्वरक या संनादि पर निर्भर करती है ।
गायक की आवाज में अंतर परिचितों की आवाज में अंतर , विभिन्न वाद्य यंत्रों की आवाज में अंतर गुणता के कारण होता है ।

ध्वनि का वेग को प्रभावित करने वाले कारक

तापमान तापमान के बढ़ने से ध्वनि का वेग बढ़ता है तथा तापमान के रूप में ध्वनि का वेग घटता है ध्वनि का वेग तापमान के वर्ग वर्गमूल का समानुपाती होता है ।

गैसों का प्रभाव

गैसों का अणु भार बढ़ने से ध्वनि का वेग घटता है तथा घटने से बढ़ता है ।
सबसे हल्की गैस हाइड्रोजन है इसीलिए इस में ध्वनि का वेग सबसे अधिक होता है तथा सबसे भारी गैस टंगस्टन हेक्साफ्लोराइड है इसीलिए इस में ध्वनि का वेग सबसे कम होता है

ध्वनि का परावर्तन
जब उन्होंने किसी सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाती है तो यह घटना धोनी का परावर्तन कहलाता है ।

Sound से ssc exam में पूछे गए प्रश्न

एसएससी एग्जाम में साउंड से बार बार पूछे जाने वाल प्रश्न नीचे दिए गए है ।

डेसीमल किसे मापने के लिए प्रयोग किया जाता है – —

  1. खून में हीमोग्लोबिन
  2. पेशाब में शक्कर
  3. वातावरण में ध्वनि
  4. वायु में कण

Ans –3

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