ज्ञान के प्रकार , विशेषता , अर्थ , प्रकृति ,

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ज्ञान से आशय वास्तविकता के किसी पझ के प्रति जागरूकता तथा समाज से है जो कि सत्य विश्वास पर आधारित हो ।

यह स्पष्ट सूचना या तथ्य के जो की तार्किक प्रक्रिया के प्रयोग के द्वारा वास्तविकता से प्राप्त किया जाता है ।
पारंपरिक दार्शनिक उपाग्रम के अंतर्गत ज्ञान के लिए 3 शब्दों का होना आवश्यक माना गया है ।

  1. सत्यता
  2. साक्ष्य
  3. विचार

इसके अनुसार ज्ञान को परिभाषित किया जा सकता है कि ज्ञान साक्ष्य पर आधारित सत्य विश्वास है ।

ज्ञान की अवधारणा — शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य ज्ञान प्रदान करना है सभी दार्शनिक। इस विचार से पूर्ण सहमत है यह ज्ञान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि सत्य की वास्तविकता ज्ञान से अलग नहीं किया जा सकता है ।
यदि सत्य का ज्ञान नहीं होगा तो अस्तित्व ही कहां रह जाएगा भारतीय दर्शन में ब्रह्म ( सत्य ) और ज्ञान में कोई भेद नहीं माना गया है ।

जैमिनी मीमांसा दर्शन में कहा गया है कि सत्य स्वयं प्रकाशित होता है इस दृष्टि से ज्ञान की उत्पत्ति अपने आप होती है । वह मनुष्य के मन में स्वयं उद्रभाषित होता है क्योंकि सत्य और ज्ञान एक ही है इस ज्ञान को ईश्वरीय ज्ञान अर्थात सत्य द्वारा प्रदत माना जाता है ।

ज्ञान संज्ञानात्मक स्तर पर दिया जाता है जैसे परिभाषाएं , सिद्धांत , नियम , पहचान , वर्गीकरण , प्रक्रिया , चरण , व्याख्या , विश्लेषण संश्लेषण मूल्यांकन आदि । संज्ञानात्मक स्तर पर विज्ञान के सैद्धांतिक पक्ष को संप्रेषित किया जाता है इसका उद्देश्य बुद्धि को निश्चित दिशा में प्रयोग करने हेतु ज्ञानात्मक योग्यता करना होता है ।

भावनात्मक स्तर पर भी ज्ञान का महत्व है । भावनात्मक क्रियाएं मनुष्य की वे प्रारंभिक प्रक्रिया है जो हमें पशुओं से अलग करती है । मनुष्य को दूसरे मनुष्य के भावों को परखने समझने एवं अपने भाव को समझ कर अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने संबंधी ज्ञान प्रदान करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण कार्य है ।

मूल्य एवं नैतिकता से संबंधित भाव को विकसित करके मनुष्य को नियंत्रित व्यवहार के लिए तैयार करने में भावनात्मक ज्ञान उपयोगी है ।

क्रियात्मक प्रस्तर का ज्ञान भी क्रियाओं को कुशलता पूर्वक करने में उपयोगी है खेलकूद मशीन वस्तुओं के निर्माण जीवन के लिए उपयोगी क्रियाओं से संबंधित ज्ञान श्रेणी में आता है ।

ज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा

ज्ञान वह बौद्धिक अनुभव है जो ज्ञानेंद्रियों द्वारा प्राप्त किया जाता है । ज्ञान शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ज्ञा धातु से हुई है जिसका अर्थ है ” जानना ” बौद्ध एवं अनुभव आदि इससे स्पष्ट है कि ज्ञान वह माध्यम है जिसमें कोई तक वस्तु एवं अवधारणा की उसी रूप में समझ समझा जा सकता है जिस रूप में वह है ।

ज्ञान knowledge शब्द का हिंदी रूपांतरण है जिसका आशय जानने से है । ज्ञान प्राप्त करने हेतु बुद्धि का होना आवश्यक है ।

पृथ्वी पर मनुष्य ही एकमात्र ऐसा चेतन प्राणी है जो विचार चिंतन मनन एवं अनुभव प्राप्त करने में समर्थ है जिसके आधार पर वह नए तथ्य एवं तत्वों से अवगत है ।

Types of knowledge in hindi

ज्ञान की उत्पत्ति में दो प्रमुख पझ होते है ।

  • ज्ञाता
  • ज्ञय

ज्ञान ज्ञाता के ही आसपास घूमता है अतः ज्ञाता के अभाव में ज्ञान का अस्तित्व संभव नहीं है । जब मनुष्य किसी वस्तु या विचार को अनुभूति बोध विश्वास तर्क एवं अनुभव के आधार पर स्वीकार कर देता है । तभी ज्ञान का सृजन होता है । इस क्रम में निरंतर चलते रहने से ज्ञान में वृद्धि होती है ।
दूसरे शब्दों में ज्ञान का अर्थ उन सूचनाओं का संग्रह है जो किसी वस्तु परिस्थिति और अनुभव की समझ को विकसित करने में सहायक होते हैं ।

ज्ञान समस्त शिक्षा का आधार है शिक्षा किसी भी प्रकार का हो चाहे विद्यालय औपचारिक या अनौपचारिक ज्ञान साधन एवं साध्य दोनों ही रूपों में पाया जाता है।

ज्ञान की विशेषताएं

  • ज्ञान शक्ति होती है ।
  • ज्ञान समाप्त नहीं हो सकता है ।
  • सत्यता का नाम ही ज्ञान है ।
  • ज्ञान की सीमा नहीं होती है अतः ज्ञान जगत अत्यंत है इसमें ज्ञान एवं अज्ञात सभी ज्ञान समाहित रहता है ।
  • ज्ञान का स्रोत सूचना है ।
  • ज्ञान 3 तथ्यों पर आधारित है सत्ता साक्षी एवं विचार ।
  • ऐसा कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति जितना ज्ञान प्राप्त करेगा उनके ज्ञान की भूख और बढ़ती जाएगी ।
  • ज्ञान निरंतर रहता है अर्थात ज्ञान निरंतर होती रहती है ।
  • ज्ञान बहु आयामी है जिसमें चिंतन अध्ययन एवं अनुसंधान के द्वारा नवीन ज्ञान तथा नए विषय स्रोतों की उत्पत्ति निरंतर होती रहती है ।

ज्ञान सतत रूप से विकसित होता रहता है जिसके फलस्वरूप विषयों की निरंतरता बनी रहती है ।

उपर्युक्त वर्णित समस्त विशेषताओं के फल स्वरुप विज्ञान जगत कमी भी एक जैसा नहीं पाया जा सकता है जिसके कारण प्रकार एवं प्रकृति में परिवर्तन होता रहता है ।

ज्ञान की प्रकृति ( Nature of knowledge )

ज्ञान को भली-भांति समझने के लिए इसकी प्रकृति का ज्ञान होना अति आवश्यक है ज्ञान की प्रकृति को हम तीन रूपों में समझ सकते हैं ।

  1. ज्ञान एक साधन के रूप में
  2. ज्ञान एक साध्य के रूप में
  3. ज्ञान एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में

ज्ञान एक साधन के रूप में

ज्ञान का सृजन इसी उद्देश्य के लिए होता है कि इसकी सहायता से सिद्धांतों और नियमों को आसानी से समझा जा सके ।

ज्ञान समझने के लिए एक साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है