मनोवृति , मनोवृत्ति के घटक | शिक्षण परिस्थितियों में मनोवृति में परिवर्तन

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मनोवृत्ति किसे कहते है ?

मनोवृति किसी व्यक्ति वस्तु या घटना के प्रति एक खास नाम से अनुप्रिया करने की मानसिकता तत्परता होती है उसे मनोवृति कहते हैं ।

मनोवृति में व्यक्ति अनुकूल या प्रतिकूल की बीमा पर किसी व्यक्ति वस्तु या घटना के प्रतिक्रिया करने की तत्परता होती है ।

उदाहरण के तौर पर जिस छात्र के मनोवृति कला के प्रति अनुकूल होती है तो उसकी मनोवृति कलाकार , रंग , चित्रकारी , अजायबघर इत्यादि के प्रति भी अनुकूल होगी ।

उसी तरह किसी यदि छात्र की मनोवृति कला के प्रति प्रतिकूल होगी तो वह कला के विभिन्न पहलुओं को छोटा ( तुच्छ ) बताएगा । उसके प्रति नापसंद करेगा ।

मनोवृति के मुख्य 3 घटक होते है

  1. संज्ञानात्मक घटक
  2. भावात्मक घटक
  3. व्यवहारात्मक घटक

संज्ञानात्मक घटक

संज्ञानात्मक घटक में व्यक्ति की मनोवृति वस्तु के प्रति ज्ञान तथा उसका अपना विश्वास इत्यादि सम्मिलित होता है ।

भावात्मक घटक

भावनात्मक घटक में व्यक्ति के मन में मनोवृति वस्तु के प्रति एक सुखद या दुखद भाव होता है ।

व्यवहारात्मक घटक

इसमें व्यक्ति के मन में अपनी मनोवृति वस्तु के प्रति प्रति कोलिया अनुकूल व्यवहार करने की तत्परता संयोजित होती है ।

नोट :- मनोवृति की एक प्रमुख विशेषता यह है कि मनोवृतिअर्जित होती है और यह कक्षा में विभिन्न तरह के शिक्षण को प्रभावित करती है ।

शिक्षण परिस्थितियों में मनोवृति में परिवर्तन

मनोवृति जब एक बार निर्भित तो उसमें परिवर्तन लाना थोड़ा कठिन कार हो जाता है , क्योंकि मनोवृति व्यक्ति की आवश्यकता भाव तथा आत्म सम्पत्य ( self concept ) से संबंधित होती है ।

मनोवृति में परिवर्तन का अर्थ व्यक्ति के भाव , आवश्यकता एवं आत्म सम्प्रत्य में परिवर्तन है ।

शायद इन्हीं कारणों से मनोवृति परिवर्तन साधारण तत्व के कारण होता है , फिर भी शिक्षण परिस्थितियों में शिक्षकों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है जिसमें उनके लिए छात्रों के मनोवृति में परिवर्तन कर उसकी जगह एक अधिक स्वस्थ एवं शिक्षा मुखी मनोवृति अनिवार्य होता है ।

खासकर कभी कभी देखा गया है कि किसी किसी छात्र की मनोवृति शिक्षा के प्रति या किसी विषय के प्रति कुछ कारणों से प्रतिकूल हो जाती है

ऐसी परिस्थिति में छात्र की अभिरुचि शिक्षा में समाप्त होने लगती है और वह धीरे- धीरे वह समस्या छात्र या प्रॉब्लम है स्टूडेंट बनने लगता है ।

ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए शिक्षकों को उन विधियों का ज्ञान होना आवश्यक एवं अनिवार्य है जिनके सहारे छात्रों की ऐसी प्रतिकूल मनोवृति में परिवर्तन ला सकें ।

कुछ ऐसी प्रमुख विधियां हैं विधियां हैं

  1. शिक्षक जब भी कोई मनोवृति परिवर्तन कार्यक्रम प्रारंभ करें तो सबसे पहला कदम उनके लिए यह होना चाहिए कि छात्रों की वर्तमान मनोवृति विभिन्न विषयों के प्रति कैसी है ।
  2. मनोवृति का संबंध चुकी व्यक्ति के आत्म सम्प्रत्य तथा व्यक्तिगत पहचान अधिक होता है ।

बाइडर ( मनोवैज्ञानिक के प्रयोग ) ने एक अध्ययन कर इसकी पुष्टि की है कि जब छात्र एक समूह में कार्य करते हैं और विभिन्न मुद्दों पर भूमिका निर्वाह किया करते हैं तो उन मुद्दों के प्रति उनकी मनोवृति उस परिस्थिति के अपेक्षा अधिक पर परिवर्तन हुई , जब छात्र कक्षा में परंपरागत भाषा विवेचना मुद्दों पर विचार करते थे ।

अतः आज स्कूल में मनोवृति परिवर्तन का कार्यक्रम ऐसा होना चाहिए कि उसमें छात्रों की सामूहिक प्रक्रिया का समावेशन अधिक से अधिक हो ।

3. मनोवृति परिवर्तन में आंखों देखी या प्रत्यक्ष अनुभूतियों या किताब पढ़कर प्राप्त अनुभूतियों या कुछ कह सुनकर प्राप्त अनुभूतियों से अधिक प्रभाव कारी होती है ।

एक अध्ययन में पाया गया कि जब एक अपराधी छात्रों को पुलिस द्वारा खेलकूद संबंधित कार्यक्रम में रेफरी तथा प्रशिक्षक बना दिया गया तो पुलिस के प्रति उनके मन में गिरना और और विश्वास की मनोवृति में परिवर्तन हो गया है